Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 56, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 56, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
आस्थाबन्धो महाबाहो जगद्भावत्वमात्मनः ।
न स्थिरास्थिरयोः फेनशैलयोरिव राजते ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महाबाहो श्रीरामचन्द्रजी,
आत्मा की जगतस्वभावता यानी जन्म नाश आदि स्वभावता अन्योन्य तादात्म्य संसगध्यासरूप
आस्था बन्धन ही है, उससे अतिरिक्त कुछ नहीं है । वह स्थिर ओर अस्थिर आत्मा ओर जगत
का तादात्म्याध्यासरूप आस्था का बन्ध फेन ओर पर्वत के तादात्म्याध्यास की तरह शोभित
नहीं होता