Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 56, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 56, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
अथ चेदस्ति नास्तीदमिति निश्चयवानसि ।
तथापि भावनासङ्गः कथं युक्तश्चलाचले ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
यह
जगत सदसत् है, ऐसा यदि आपका निश्चय है, तो भी सत्ता और असत्ताके परस्पर नाशक होने के
कारण अनियत स्वभाववाले दृश्य में पूर्वोक्त अध्यास केसे हो सकता है ?