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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 56, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 56, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

अकर्तृकं जगज्जालं भवत्वथ सकर्तृकम् । मा त्वमेतेन शबलं भावयन्नास्य चेतसि ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

यह जगत-जाल कर्तारहित हो अथवा सकर्तृक हो, आप इससे अन्योन्य तादात्म्याध्यासवश एकत्व को (देहाद्यात्मभाव को) देखते हुए बुद्धिउपाधिपरिच्छेद में स्थित न होइये