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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 57, Verse 32

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 57, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 57 · श्लोक 32

संस्कृत श्लोक

पाताले ब्रह्मलोके च स्वर्गे च वसुधातले । व्योम्नि कतिपया एव दृश्यन्ते दृष्टदृष्टयः ॥ ३२ ॥

हिन्दी अर्थ

पाताल में, ब्रह्मलोक में, स्वर्ग में, पृथिवी पर और अन्तरिक्ष में जिन्हें चिदेकरस का परिज्ञान हो गया ऐसे विरल ही पुरुष दिखाई देते हैं