Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 57, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 57, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 57 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
न तदस्ति जगत्यस्मिन्सपातालसुरालये ।
यन्नामात्मवतो ज्ञस्य किंचित्कार्यतरं भवेत् ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
पाताल और स्वर्ग सहित इस जगत में वह कार्य नहीं है, जो कि
आत्मज्ञानी पुरुष को अवश्य कर्तव्य हो, क्योंकि सब कामनाओं की प्राप्ति से वह कृतकृत्य है