Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 59, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
वासनावशतो ब्रह्ममनसा कल्पितं वपुः ।
तेजसा श्रितकुड्येन हेमाभत्वमिवात्मनः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि शंका हो कि हमारे चित्त की स्थिति के अनुसार देहादि जगत उत्पन्न हुआ है, फिर आप कैसे
कहते हैं कि ब्रह्मा के संकल्प से उत्पन्न हुए जगत को ब्रह्मा के मन का अनुसारी ही होना उचित है, इस
पर कहते है ।
जैसे सोने, चाँदी, नीलम आदि की दीवारों पर पडा हुआ सूर्य आदि का प्रकाश तत्-तत् आधार के
अनुरूप अपने स्वरूप की कल्पना करता हे वैसे ही ब्रह्मा के मन ने हम लोगों के वासना, कर्म आदि के
अनुसार संकल्प करने से जगत की कल्पना कर रक्खी है