Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 59, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
इत्थं सर्वेषु भूतेषु केषुचित्त्वथवा पुनः ।
संकल्पयति संसारं परं पश्यति चित्स्थितम् ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
समष्टिदुष्टि से सब भूतो में और व्यष्टिदृष्ट से अथवा एक जीववाद से कुछ लोगों मे स्थित मन ही
चित् मेँ स्थित संसार का संकल्प करता है और पर ब्रह्म का साक्षात्कार भी करता हे