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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 6, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 6, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

इमे ते भूतलस्थानाद्व्योम्नि तारकतां गताः । वैमानिकाश्चरच्चारुचामीकरमयातपाः ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

ये भूतल से आकाशमें तारे रूप बने हुए विमान से चलनेवाले सिद्ध लोग हे, जिनके शरीर ओर विमान की कान्तियाँ संचरणशील सुन्दर सुवर्णमय सी प्रतीत हो रही हैं