Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 61, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 61, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
द्रष्टव्यः सर्वविच्छेदः संसारानुगतः सदा ।
साधुरेवानुगन्तव्यो मयूरेणाम्बुदो यथा ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
सब प्रिय वस्तुओं
का विच्छेद संसारमात्र के लिए अवश्यंभावी है, ऐसा सदा विचार करना चाहिये । जैसे मयूर मेघो का
अनुसरण करता है वैसे साधुओं का ही अनुसरण करना चाहिये