Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 61, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 61, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
नित्यमापूर्यतां याति सुधायामिन्दुसुन्दरी ।
राम राजससत्त्वस्य मोक्षमायात्यसौ यथा ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, राजससात्त्विक पुरुष की बुद्धि शान्ति आदि सुधा के
बढ़ने पर वृद्धि को प्राप्त हो जाती है, अतएव वह शुक्लपक्ष के चन्द्रमा के तुल्य सुन्दर हो जाती है,
जिससे वह पुरुष मोक्ष को प्राप्त होता है