Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 62, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
परां शान्तिमुपागच्छ यथान्ये गुणशालिनः ।
अविचार्यास्त एवेह गोमायुशिशुधर्मकाः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे ओर गुणी
पुरुष शान्ति को प्राप्त हुए हैं वैसे ही आप परमशान्ति को प्राप्त होइए | जो स्वार्थ कुशलता से दूसरों को
ठगनेवाले सियार सदुश हैं और बच्चों की तरह यथेष्ट आचारवाले हैं, वे मूढ पुरुष ही विचार योग्य नहीं
हैं