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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 7, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 7, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

अबलामनुबध्नाति मामेष किल नाङ्गकः । पाहि मामबलां नाथ दीनां त्वच्छरणामिह ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

इसलिए हे नाथ, आप मेरी रक्षा कीजिये । मेँ अबला हूँ ओर दीन हूँ। आप ही यहाँ पर मेरे शरण हैं हे सज्जनशिरोमणे, दीनो को आश्वासन देना सच्चरित्र लोगों का व्रत है, ऐसा आप जानिये