Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 8, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 8, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
गन्धर्वनगरोद्यानलीलाविरचनैरसौ ।
स्रष्टानन्तजगत्सृष्टेः कालस्यानुकृतिं गतः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
गन्धर्वनगर के
उद्यानों की क्रीड़ाओं के निर्माण से एकमात्र मनोरथ द्वारा अनन्त संसारों की सृष्टि का सर्जनहार होकर
शुक्र काल की समता को प्राप्त हुआ