Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 8, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 8, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
पुण्यक्षयानुसंधानात्ततश्चावनिमण्डले ।
तयैव सह मानिन्या पपातोपहताकृतिः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
तदुपरान्त स्वर्ग से पतन के स्मरण के भय से जिनका दिव्य शरीर गल गया था,
ऐसे श्री शुक्राचार्य पुण्यक्षय से उस सुन्दे के ही साथ भूमि पर गिर पड़े