Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 1, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 1, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
कचत्कटकभारक्तीकृतान्योन्यतताम्बरा ।
वातव्याधूतपुष्पेव मन्दारवनमालिका ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
उस सभा ने चमक रही कड़ों की कान्तियों से सब के वस्त्र लाल
कर दिये थे और परस्पर के आकर्षण फैला दिये गये थे, अतएव वह सभा वायु से जिसके फूल उड़ाये गये
हो, ऐसी मन्दारवनराजि के तुल्य थी