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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 12, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । एवं विचारयंस्तत्र स्वराज्ये जनको नृपः । चकाराखिलकार्याणि न मुमोह च धीरधीः ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे वत्स, वहाँ अपने राज्य में इस प्रकार विचार कर रहे धीरमति राजा जनक ने सब राजकार्य किये, किन्तु उन्हें पहले के समान अहन्ता ममता से मोह नहीं हुआ | उनका मन कहीं हर्ष स्थानों मेँ उल्लास को प्राप्त नहीं हुआ

सर्ग सन्दर्भ

ग्यारहवाँ सर्ग समाप्त बाहरवाँ सर्ग राजा जनक की जीवन्मुक्तिरूप से स्थिति का ओर विचार तथा प्रज्ञा के विचित्र महात्म्य का विस्तार से वर्णन |