Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 12, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
तावत्तावत्स्वकेनैव चेतसा प्रविचार्यते ।
यावद्यावद्विचाराणां सीमान्तः समवाप्यते ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जब तक फल की प्राप्ति न हो, तब तक विचार का त्याग नहीं करना चाहिये, ऐसा कहतेर्है।
तब तक अपने चित्त से आत्मतत्त्व का विचार करना चाहिये जब तक विचारों की सीमा का अन्त
(आत्मज्ञानरूप फल) प्राप्त न हो