Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 12, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
यस्योज्ज्वलति तीक्ष्णाग्रा पूर्वापरविचारिणी ।
प्रज्ञादीपशिखा जातु जाड्यान्ध्यं तं न बाधते ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस पुरुष की पूर्वापर का विचार करनेवाली, कुशाग्र प्रज्ञारूपी दीपशिखा जलती है, उसे
कभी भी अज्ञानरूपी अन्धकार क्लेश नहीं पहुँचाता