Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 12, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
प्रज्ञाविरहितं मूढमापदल्पापि बाधते ।
पेलवाचानिलकला सारहीनमिवोलपम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे कोमल वायु की लहर असार तृण को लथेड देती है वैसे ही प्रज्ञा से रहित मूढ पुरुष को
छोटी-सी आपत्ति भी पीड़ित कर डालती है