Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 103
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 13, verse 103 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 103
संस्कृत श्लोक
जडेन मूकेनान्धेन निहतो मनसापि यः ।
मन्ये स दह्यते मूढः पूर्णचन्द्रमरीचिभिः ॥ १०३ ॥
हिन्दी अर्थ
जो पुरुष जड, मूक ओर अन्धे मन से भी मारा गया,
वह मूढ चन्द्रमा की किरणों से जलता है, ऐसी मेरी समझ है