Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 91
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 13, verse 91 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 91
संस्कृत श्लोक
वायुतः स्पन्दशक्तिर्या सा चिता चेत्यते यदा ।
सचेत्या चित्तदैवान्तः संकल्पाद्याति चित्तताम् ॥ ९१ ॥
हिन्दी अर्थ
वायु की जो स्पन्दशक्ति है, वह चित् से चेतन बनाई जाती है, चेत्यसहित
वह चित् तभी संकल्प से चित्तता को प्राप्त हो जाता है