Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 97
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 13, verse 97 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 97
संस्कृत श्लोक
मुधा मैवमनर्थाय मनः संकल्पयानघ ।
मनो मिथ्यासमुदितं नास्त्यत्र परमार्थतः ॥ ९७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे अनघ, अनर्थ के लिए व्यर्थ मन का संकल्प आप मत कीजिये । मन मिथ्या ही उदित हुआ है, परमार्थतः
वह यहाँ पर है ही नहीं