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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 99

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 13, verse 99 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 99

संस्कृत श्लोक

असम्यग्ज्ञानसंभूता कल्पना मृगतृष्णिका । हृन्मरौ तव संशान्ता सम्यगालोकनान्मुने ॥ ९९ ॥

हिन्दी अर्थ

हे मननशील श्रीरामचन्द्रजी, सम्यक्‌ ज्ञान से आपके हृदयरूपी मरुभूमि में असम्यक्‌ ज्ञान से उत्पन्न हुई मृगतृष्णारूपी कल्पना शान्त हो गई है