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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 16, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 16, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

अहंकारक्षये देहः किलावश्यं विनश्यति । मूले क्रकचसंलूने सुमहानिव पादपः ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

अहंकार का विनाश होने पर यह शरीर अवश्य नष्ट हो जाता है, जैसे कि तने के आरा द्वारा काटे जाने पर महान वृक्ष गिर जाता हे