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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 18, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । युक्ताशयानां महतामहतानां कुदृष्टिभिः । स्वभावोऽयं महाबाहो लीलया चरतामिह ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे आजानबाहु श्रीरामचन्द्रजी, समाहित चित्तवाले, काम, लोभ आदि कुदृष्टियों से अदूषित, इस संसार में लीलापूर्वक विचरण कर रहे महात्माओं की यह स्थिति आप सुनिये

सर्ग सन्दर्भ

सत्रहवाँ सर्ग समाप्त अट्टारहवाँ सर्ग॑ जिस स्थिति में स्थित पुरुष संसार में दुःखी नहीं होता, उस स्थिति का विस्तारपूर्वक श्रीरामचन्द्रजी के लिए उपदेश ।