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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 18, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

परं पदमुपारूढो भङ्गुरां जागतीं स्थितिम् । अन्तःशीतलया बुद्ध्या हसन्निव निरीक्षते ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

परम पद में आरूढ होकर वह विनाश को प्राप्त होनेवाली जगत की स्थिति को अन्तःशीतल अपनी बुद्धि से उपहास करते हुए देखता है