Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 18, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
उदारः पेशलाचारः सर्वाचारानुवृत्तिमान् ।
अन्तः सर्वपरित्यागी लोके विहर राघव ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, उदार, मधुर आचारवाले, सबके (अज्ञानियों के भी ) कर्म आदि आचारो में
अनुवर्तनशील होकर लोक में विहार कीजिये