Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 18, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
अबद्धस्यैकरूपस्य सर्वगस्यात्मनः कथम् ।
बन्धः स्यात्तदभावे तु मोक्षः कस्य विधीयते ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
देही का बन्धन क्यो नहीं है, ऐसा प्रश्न होने पर उसमे युक्ति दिखाते हैं।
असंग, एकरूप, सर्वव्यापक, आत्मा का बन्धन कैसे हो सकता है, जब वह बद्ध नहीं है, तो मोक्ष
का किसके लिए विधान हो सकता है ?