Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 18, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
भोगबन्धुजगद्भावैः कर्मभिश्च शुभाशुभैः ।
आत्मनो नास्ति संबन्धः किमेताननुशोचसि ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
भोगों से, भोगसाधक बन्धुओं से, जगत के माला, चन्दन आदि पदार्थों से और उनकी प्राप्ति में
निमित्तभूत शुभ-अशुभ कर्मो से आत्मा का कोई सम्बन्ध नहीं है, फिर इनके लिए आप व्यर्थ ही शोक
क्यों करते हैं ?