Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 19, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 19, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
पावनोर्धप्रबुद्धोऽभूत्पूर्वसंध्याम्बुजं यथा ।
मौर्ख्यादधिगतो नाप्तः पदे दोलायितः स्थितः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
पावन प्रातःकाल की सन्ध्या के कमल के समान अर्धं प्रबुद्ध
हुआ । मूर्खता से तो बाहर हो गया, किन्तु परमात्मवस्तु में प्राप्त नहीं हुआ, इसलिए उसकी स्थिति मध्य
में दोलायमान थी