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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 19, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 19, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

पुण्य उवाच । किं पुत्र घनतां शोकं नयस्यान्ध्यैककारणम् । वाष्पधाराधरं घोरं प्रावट्काल इवाम्बुजम् ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

पुण्य ने कहा : हे वत्स, जैसे वर्षा ऋतु अन्धता की एकमात्र कारण तथा भाप के समूह को धारण करनेवाली जल-सम्बन्धी गर्मी को मेघ बना देती है, वैसे ही तुम अन्धता के एकमात्र कारण तथा अश्रुओं की धारा धारण करनेवाले कमल सदृश नेत्र सम्बन्धी घोर शोक को निबिड बना रहे हो