Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 2, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 2, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
किमुक्तं स्याद्भगवता मुनिना मनसः क्षये ।
किं चेन्द्रियजये प्रोक्तं किमुक्तमथवात्मनि ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
भगवान
श्रीवसिष्ठजी ने मन के क्षय के लिए क्या साधन और फल कहा है अथवा आत्मा के विज्ञात होने पर क्या
कहा है ?