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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 20, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 20, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

रक्तमांसास्थिसंघाताद्देहादेवास्थिपञ्जरात् । कोऽहं स्यामिति चित्तेन स्वयं पुत्र विचारय ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोई शंका करे कि सम्पूर्ण देहो में मैं कैसे एक हूँ, तो इस पर अहप्रत्यवेद्य का ही यह कौन पदार्थ है, यो विचार करो, इस आशय से कहते है । हे वत्स, रक्त मांस आदि जड संघात अस्थिपंजररूप देह से अन्य चेतन स्वभाव मैं कौन हूँ, ऐसा अपने चित्त से स्वयं विचार करो