Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 22, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 22, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
बलेर्विज्ञानसंप्राप्तिं पुनर्मद्बोधवृद्धये ।
विभो कथय खिद्यन्ते सन्तो नावनतं प्रति ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे विभो, फिर आप मेरी ज्ञानवृद्धि के लिए बलि की बोधप्राप्ति प्रकार को कहिये | गुरुजनों को शिष्यो को
उपदेश देने में कभी खेद नहीं होता