Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 23, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 23, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
अविष्णुनापि तेनेह हिरण्याक्षादयोऽसुराः ।
पातिताः कल्पवातेन मेरुकल्पद्रुमा इव ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
हमारे पूर्वज आदि को भी उसीने अपने वश में कर विष्णु द्वारा मरवाया है, इस आशय से कहते हैं ।
यद्यपि वह विष्णु नहीं है, तथापि उसने इस लोक में हिरण्याक्ष आदि असुरों को ऐसे गिराया, जैसे
कि प्रलयकाल का वायु मेरुपर्वत के कल्पद्रुम को गिराता है