Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 24, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 24, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
करोति चित्तं तेनैतच्चित्तं नियतियोजकम् ।
नियत्यां नियतिं कुर्वन्कदाचित्स्वार्थनामिकाम् ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
हमारे मत में कर्ता भी मन ही है, वह यहाँ पर
जिस वस्तु की जैसी कल्पना करता है, वह वैसे ही होती है। वह जैसे नियति का संकल्प करता है, वह
वैसे ही होती है ॥३ १॥
पूर्वोक्त कथन का ही उपपादन करते हैं।
चित्त स्वभावतः नियत फलवाले, अपवाद विषयों मे अनियत फलवाले व्यावहारिक पदार्थों को एवं
अत्यन्त अनियत फलवाले प्रातिभासिक पदार्थो का भी निर्माण करता है, इसलिए यह चित्त नियति का
भी उपपादक है