Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 24, Verse 48
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 24, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
साधुतामागतो जीवो योग्यो ज्ञानकथाक्रमे ।
निर्मलाकृतिरादत्ते पट उत्तमरञ्जनाम् ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्वोक्त चारों प्रकार के क्रमों में शुद्ध चित्त पुरुष ही अधिकारी है, ऐसा कहते हैं।
साधुता को (शुद्धचित्तता को) प्राप्त हुआ पुरुष ही ज्ञान कथा के आरम्भ में योग्य है । निर्मल वस्त्र
ही उत्तम रंग को ग्रहण करता है, मलिन ग्रहण नहीं करता