Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 25, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 25, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 25 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
अद्यापरिमिताकारकारणैकतयात्मनि ।
सर्वतः सुखमभ्येति रसायनमिवार्णवे ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे अपरिच्छिन्न स्वरूप ब्रह्म के साथ अभेद
स्थिति से आत्मा में चारों ओर से पूर्ण सुख क्षीरसागर में अमृतमंथन से रसायन के समान आविर्भूत
होता है वैसे मे आज शुक्राचार्यजी से पूछता हू