Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 3, Verses 14–16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 3, verses 14–16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 14-16
संस्कृत श्लोक
विविशुस्तत्र ते सर्वे नृपा दशरथादयः ।
वसिष्ठाद्याश्च मुनयो ऋषयो ब्राह्मणास्तथा ॥ १४ ॥
मन्त्रिणश्च सुमन्त्राद्याः सौम्याद्याश्च विपश्चितः ।
राजपुत्राश्च रामाद्या मन्त्रिपुत्राः शुभादयः ॥ १५ ॥
अमात्याद्याः प्रकृतयः सुहोत्राद्याश्च नागराः ।
मालवाद्यास्तथा भृत्याः पौराद्याश्चैव मालिनः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
उस सभा मे उन सब दशरथ आदि राजाओं, वसिष्ठ आदि मुनियों, ऋषियों,
ब्राह्मणों, सुमन्त्र आदि मन्त्रियों, सौम्य इत्यादि विद्वानों, राम आदि राजकुमार, शुभ आदि मनत्रीपुत्रों,
अमात्यो, प्रजाओं, सुहोत्र आदि नागरिको, मालव आदि नौकर-चाकरों ओर माली आदि पुरवासि्यो ने
प्रवेश किया