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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 30, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 30, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 30 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

तत्तापाक्रान्तितापेन त्रिजगन्ति विकासिना । कल्पान्तसूर्यगणवन्नवयैव करश्रिया ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे प्रलय के बारह सूर्य बढ़ रहे ताप से ओर अपनी प्रखर किरणों से तीनों जगतां को सन्तप्त करते हैँ वैसे ही दिन -पर-दिन बढ़ रही आक्रमणजनित पीड़ा और करग्रहणजनित नित्य नई-नई संपत्ति से उसने तीनों जगतां को सन्तप्त किया