Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 30, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 30, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 30 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

प्रार्थयांचक्रिरेऽथाजं दैत्येन्द्रेभपतेर्वधे । न क्षमन्ते महान्तोपि पौनःपुन्येन दुष्क्रियाम् ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर उन्होने दैत्यराजरूपी गजराज के वध के लिए ब्रह्माजी से प्रार्थना की । ठीक ही है, बार- वार किये गये अपराध को महापुरुष भी सहन नहीं कर सकते