Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 30, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 30, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 30 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
तेनाराजत पुत्रेण हिरण्यकशिपुर्भृशम् ।
सर्वसौन्दर्ययुक्तेन वसन्तेनेव वत्सरः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे सब प्रकार की सुन्दरता से युक्त बसन्त से वर्ष सुशोभित होता हे वैसे ही उस पुत्र से हिरण्यकशिपु
अत्यन्त सुशोभित हुआ