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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 31, Verse 52

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 31, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 52

संस्कृत श्लोक

अयं मे कर्णिकाकोशनिलीनब्रह्मषट्पदः । पद्मः करतले श्रीमान्स्वनाडीकुहरोद्भवः ॥ ५२ ॥

हिन्दी अर्थ

यह सुन्दर कमल मेरी हथेली पर विद्यमान है, जो मेरी नाभि से उत्पन्न हुआ है और जिसकी कर्णिका के मध्य में ब्रह्मारूपी भ्रमर छिपा हे