Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 36, Verse 80
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 36, verse 80 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 80
संस्कृत श्लोक
त्वयि स्थिते मयि विगतामयात्मनि स्वसंस्थितौ व्यपगतरागरञ्जने ।
क्व बन्धनं क्व च विपदः क्व संपदो भवाभवौ क्व शममुपैमि शाश्वतम् ॥ ८० ॥
हिन्दी अर्थ
त्वत्स्वरूप से स्थित होने पर मेरी सर्व अनर्थनिवृत्ति सिद्ध हो गई है, यो उपसंहार करते हैँ ।
मेरे दोषरहित आत्माराम रागरंजना से शून्यत्वत्स्वभाव होने पर मेरा बन्धन कहाँ, विपत्तियाँ कहाँ,
सम्पत्तियाँ कहाँ और जन्म-मरण कहाँ ? अतः मैं शाश्वत सुख विश्रान्ति को प्राप्त होता हूँ