Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 37, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 37, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
निर्विकल्पसमाधिस्थश्चित्रार्पित इवाचलः ।
शैलादिव समुत्कीर्णो बभौ स्वपदमास्थितः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
निर्विकल्प समाधि में स्थित
स्वरूपसाग्राज्य को प्राप्त प्रह्लाद चित्रलिखित की तरह निश्चल अतएव पर्वत से गढकर बनाया हुआ-
सा शोभित हुआ