Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 38, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 38, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
ततोऽहमपि शून्येऽस्मिन्नष्टचन्द्रार्कतारके ।
वपुःप्रशान्तिमाधाय स्थितिमेष्यामि तत्पदे ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
अपनी लीला का नाश होने से मैं भी जिसमें चन्द्रमा, सूर्य और तारे नष्ट हो गये ऐसे इस शून्य जगत् में
लीला के लिए गृहीत अपने शरीर का उपसंहार कर फिर संसार की अनुत्पत्ति के लिए उस पूर्ण आत्मपद
में स्थित हो जाऊँगा