Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 38, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 38, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
तस्माद्रसातलं गत्वा यथावत्स्थापयाम्यहम् ।
स्वे क्रमे दानवाधीशमृतुः पुनरिव द्रुमम् ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए पाताल में जाकर जैसे वसन्त आदि ऋतु वृक्ष
को फिर पूर्ववत् स्थित करती हे वैसे ही मैं दानवराज प्रह्लाद को अपने कर्म में पूर्वस्थापित करता हूँ