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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 38, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 38, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

प्रह्लादे पदविश्रान्ते पाताले गतनायके । कष्टं सृष्टिरियं प्रायो निर्दैत्यत्वमुपागता ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रह्माद के समाधि से साम्राज्य में विश्रान्त होने से ओर पाताल के नायकरहित होने पर यह सृष्टि प्रायः दैत्य शून्य हो गई है, यह कम कष्ट की बात नहीं है