Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 39, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
प्राणापानपरामृष्टानाडीविवरसंविदः ।
वातार्तस्येव पद्मस्य स्पन्दोऽस्य समजायत ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे वायु से प्रेरित कमल में स्पन्द होता है वैसे ही भीतर प्रविष्ट
प्राण ओर अपान से उद्बोधित चारों ओर नाड़ी विवरो में जो संवेदन हुआ उसमें स्पन्द हो गया