Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 39, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
अहं भूतावकीर्णासु सालोकासु खगध्वजः ।
विहरामि दशाशासु मा देहमवधीरय ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
मे गरुड पर सवार होकर
अण्डज आदि चार प्रकार के प्राणियों से व्याप्त तथा सूर्य आदि के प्रकाश से युक्त दसो दिशाओं में
विहार करता हूँ, ऐसी स्थिति में तुम शरीर का परित्याग मत करो । भाव यह कि इस समय तुम्हारा मरना
शोभा नहीं देता हे